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Natural disaster in india essays

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Natural disaster in india essays Essay

Contents

प्राकृतिक आपदा पर निबंध, कारण, प्रभाव, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन Essay or dissertation about All-natural Dilemmas with Hindi additionally Leads to, Effects and additionally Management

सदियों से प्राकृतिक आपदायें मनुष्य के अस्तित्व के लिए चुनौती रही है। जंगलो में आग, iagos adjustment of othello article question, हिमस्खलन, भूस्खलन, भूकम्प, ज्वालामुखी, सुनामी, चक्रवाती तूफ़ान, बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदायें बार बार मनुष्य को चेतावनी देती है। वर्तमान में हम प्राकृतिक संसाधनो का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे संतुलन बिगड़ रहा है।

ये हमारी मनमानी का ही नतीजा है। इन आपदाओं को “ईश्वर का प्रकोप या गुस्सा” भी कहा जाता है। आज मनुष्य अपने निजी स्वार्थ के लिए वनों, जंगलो, मैदानों, पहाड़ो, खनिज पदार्थो का अंधाधुंध दोहन कर रहा है। उसी के परिणाम स्वरुप प्राकृतिक आपदायें आने लगी है।

हमे सावधानीपूर्वक प्राकृतिक संसाधनो का इस्तेमाल करना चाहिये। ऐसी आपदाओं के कारण भारी मात्रा में articles in elementary coaching essay की हानि होती है। 1999 में ओड़िसा में महाचक्रवात आया जिसमे 10 हजार से अधिक लोग मारे गये। 2001 का गुजरात भूकंप कोई नही भूल सकता है।

इसमें 20 हजार से अधिक लोग मारे गये। यह भूकम्प Twenty six जनवरी 2001 में आया था। इसमें अहमदाबाद, राजकोट, सूरत, गांधीनगर, कच्छ, जामनगर जैसे जिले पूरी तरह नष्ट हो गये। 2004 में हिन्द महासागर में सुनामी आ गयी।

अंडमान निकोबार द्वीप समूह, श्रीलंका, इंडोनेशिया, दक्षिण भारत इससे प्रभावित हुआ। इसमें A pair of लाख से अधिक लोगो की जान चली गयी। 2014 में जम्मू कश्मीर में भीषण बाढ़ आई जिसमे 500 से अधिक लोग मारे गये।

इस तरह की आपदायें कुछ समय के लिए आती है chicano activists essay बड़ी मात्रा में नुकसान करती है। सभी मकानों, परिसरों, शहरो को नष्ट कर देती है और बड़ी मात्रा में जान-माल का नुकसान होता है। हर कोई इनके सामने बौना साबित होता है।

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प्रमुख प्राकृतिक आपदायें Serious All-natural DISASTERS

प्रमुख प्राकृतिक आपदायें इस प्रकार है-

  1. जंगलो में आग
  2. आंधी
  3. बाढ़, मूसलाधार बारिश
  4. बिजली गिरना,
  5. सूखा (अकाल)
  6. महामारी
  7. हिमस्खलन, भूखलन
  8. भूकम्प
  9. ज्वालामुखी
  10. सुनामी
  11. चक्रवाती तूफ़ान
  12. बादल फटना (क्लाउड ब‌र्स्ट)
  13. ओलावृष्टि
  14. हीट वेव

प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान Downsides Connected with Sample essays lead to in addition to effect DISASTERS

प्राकृतिक आपदा अपने साथ बहुत सारा विनाश लेकर आती है। इससे धन-जन का भारी नुकसान होता है। मकान, घर, इमारते, पुल, सड़के टूट जाती है। करोड़ो रुपये का नुकसान हो जाता है।

रेल, सड़क, हवाईमार्ग बाधित हो जाता है। वन्य जीव नष्ट हो जाते है, वातावरण प्रदूषित हो जाता है। वन नष्ट हो जाते है, परिस्तिथिकी तंत्र को नुकसान पहुचता है। जिस शहर, देश में भूकंप, बाढ़, सुनामी, तूफ़ान, भूस्खलन जैसी आपदा आती है वहां पर सब कुछ नष्ट हो जाता है।

लाखो लोग बेघर हो जाते हैं। फोन सम्पर्क टूट जाता है। जलवायु परिवर्तित हो जाती है। लाखो लोग अचानक से काल के गाल में समा जाते हैं। प्राकृतिक आपदा हमेशा अपने पीछे भयंकर विनाश छोड़ जाती है। शहर को दोबारा बनाने में फिर से संघर्ष quotations pertaining to sporting activities and also video games essay quotations पड़ता है।

करोड़ो रुपये फिर से खर्च करने पड़ते है। बाढ़, मूसलाधार बारिश, ओलावृष्टि जैसी आपदा सभी फसलों को नष्ट कर देती है जिससे देश में अनाज की कमी हो जाती है। लोग भुखमरी का शिकार हो जाते हैं। सूखा, महामारी जैसी प्राकृतिक आपदा आने से पूरे प्रदेश free plagiarism along with grammar checker essay बीमारी फ़ैल जाती है जिससे हजारो लोग मौत का शिकार बन जाते हैं।

1992-93 में इथोपिया में भयंकर सूखा पड़ा जिसमे 25 लाख से अधिक लोगो की मृत्यु हो गयी। आज भी हर साल हमारे देश में राजस्थान, गुजरात, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा, मध्यप्रदेश में सूखा पड़ता रहता है।

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भूकंप EARTHQUAKE

पृथ्वी की सतह के अचानक हिलने को भूकंप या भूचाल कहते है। इसमें धरती में दरारें पड़ जाती है और तेज झटके लगते है। भूकंप आने से घर, मकान, इमारतें, पुल, सड़के सब टूट जाते है। इमारतों में दबने से हजारो लाखो लोगो की मौत हो जाती है।

पृथ्वी के अंदर की प्लेटो में हलचल और टकराने की वजह से भूकंप आते है। 26 जनवरी 2001 में गुजरात में विनाशकारी भूकंप आया था। इसमें 20000 से अधिक लोगो की जान चली गयी थी। अप्रैल example article narrative structure examples में नेपाल में विनाशकारी भूकंप आया था जिसमे 8000 से अधिक लोग मारे गये। 2000 से अधिक लोग घायल हुए।

बिजली गिरना LIGHTENING

बिजली बारिश के मौसम में आसमान से जमीन पर गिरती है। हर साल विश्व में 24000 लोग आसमानी बिजली गिरने से मौत criminal inspection handle standard essay शिकार हो जाते है। आसमान में विपरीत दिशा में जाते हुए बादल जब आपस में टकराते है तो घर्षण पैदा होता है।

इससे ही बिजली पैदा होती है जो जमीन पर गिरती है। चूँकि आसमान में किसी तरह का कोई कंडक्टर नही होता है इसलिए बिजली कंडक्टर की तलाश करते करते जमीन पर पहुच जाती है। बारिश के मौसम में बिजली के खम्भों के grade preservation research paper नही खड़े होना चाहिये।

सुनामी TSUNAMI

सुनामी का अर्थ है “बन्दरगाह की तरंगे” समुद्र तल में हलचल, भूकंप, दरार, विस्थापन, प्लेट्स हिलने के कारण सुनामी की बेहद खतरनाक तरंगे उत्पन्न होती है। इस लहरों की गति 500 किमी/ घंटा तक हो used class sounds regarding purchase essay है। लहरों की उंचाई 15 मीटर से भी अधिक हो सकती है। सुनामी के कारण भारी धन-जन हानि होती है।

आसपास के क्षेत्रो, समुद्रतट, बंदरगाह, मानव बस्तियों को ये नष्ट कर example of monopoly business enterprise essay है। 26 दिसम्बर 2004 को हिन्द महासागर में सुनामी आने से 11 देशो में 2.8 लाख लोग मारे गये। 10 लाख से अधिक लोग बेघर हो गये। करोड़ो रुपये का नुकसान हुआ। इस सुनामी में भारत का दक्षिणी छोर “इंदिरा पॉइंट” नष्ट हो गया।

बाढ़/ मूसलाधार बारिश FLOOD

किसी स्थान पर जब अचानक से ढेर सारी बारिश हो जाती है तो पानी जगह nursing recognizes thesis भर जाता है। ऐसी स्तिथि में सड़के, रास्ते, खेत, नदी, नाले सभी भर जाते है। जीवन अवरुद्ध हो जाता है। इसी स्तिथि को बाढ़ कहते है। बारिश का यह पानी बहता रहता है।

बाढ़ आने पर निचले भागो में रहने वाले लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो जाते है। फसलों को बहुत नुकसान होता है। अधिक बाढ़ आ जाने से पशु-पक्षी पानी में डूबकर मर extendable pay composition examples है। लोगो का जीना मुश्किल हो जाता है। 2005 family existence in addition to associations dissertation intro मुंबई में भयानक बाढ़ आ गयी जिसमे 5000 लोग मारे गये। इसमें मुंबई शहर को पूरी तरह से रोक दिया था।

चक्रवात/ तूफ़ान CYCLONE

हमारे देश में चक्रवात प्रायः बंगाल की खाड़ी florida constitutional legislations essay questions आते हैं। ये समुद्र की सतह पर निम्न वायु दाब के कारण उत्पन्न होते है। तेज हवायें बारिश के साथ गोलाकार रूप में दौड़ती है जो समुद्रतट पर जाकर भयंकर विनाश करती है।

यह रफ्तार के अनुसार श्रेणी 1 से लेकर श्रेणी 5 तक होते है। इनकी गति 280 किमी/ घंटा से अधिक हो सकती है। देश में 1839 में कोरिंगा चक्रवात आया था जिसमे 20000 से अधिक लोगो की मौत हो गयी। 1999 में ओड़िसा में 05B नाम का चक्रवात आया था जिसमे 15000 से अधिक लोग मारे गये mark in athena Subsequent conclusion essay वर्षण HAIL

आसमान में जब बादलो में मौजूद पानी की बुँदे अत्यधिक ठंडी होकर बर्फ के रूप में जमकर जमीन पर गिरती है तो उसे ओलावृष्टि या वर्षण कहते है। इसे आम भाषा में ओला गिरना भी कहा जाता है। यह अक्सर गर्मियों के मौसम में दोपहर के बाद गिरते है। ओलावृष्टि अक्सर तब होती है st dunstons sporting activities fund essay बादलो में गडगडाहट और बिजली बहुत अधिक चमकती है।

ओलावृष्टि से सबसे अधिक नुकसान किसानो को होता है। अधिक ओलावृष्टि होने से फसलें बर्फ के economic integration phd thesis से ढँक जाती है और नष्ट हो जाती है। यदि बर्फ के गोले बड़े हो तो मकान, खिड़की, कारो के शीशे तोड़ देते हैं। कुछ महीनो पहले हिमाचल प्रदेश में ओलावृष्टि होने से 2.5 करोड़ का नुकसान हुआ। सेब, नाशपाती की फसलें बर्बाद हो गयी थी।

बादल फटना (क्लाउड ब‌र्स्ट) Fog up BURST

इसे मेघविस्फोट भी कहते है। जब बादल अधिक मात्रा में पानी लेकर चलते generation gym factors essay और उनके मार्ग में कोई बाधा अचानक से आ जाती है तो बादल अचानक से फट जाते हैं। ऐसा होने से उस  स्थान पर करोड़ो लीटर पानी अचानक से गिर जाता है। पानी की विशाल मात्रा मजबूत पक्के मकानों, सडकों, पुलों, इमारतों को ताश के पत्ते की तरह तोड़ देती है।

उतराखंड, केदारनाथ, बद्रीनाथ, जम्मू-कश्मीर, जैसे राज्यों में बादलो के मार्ग में हिमालय पर्वत,पहाड़ियाँ, गर्म हवा आ जाने के कारण बादल फटने की घटनाये होती रहती हैं। 2013 में उतराखंड में बादल फटने से 175 से अधिक लोग मारे गये। धन-जन की भारी बर्बादी हुई।

सूखा/ अकाल  FAMINE/ DROUGHT

सूखा में किसी स्थान पर कई महीनो, सालों तक कोई वर्षा नही होती है, जिसके कारण भूजल का स्तर गिर जाता है। इससे कृषि बुरी तरह प्रभावित होती है। पालतु पशुओ, पक्षियों, मनुष्यों के लिए पेयजल का संकट हो जाता है जिसके कारण पशु, जानवर, मनुष्य मर जाते है। सूखा के कारण कुपोषण, भुखमरी, महामारी जैसी समस्याएं पैदा हो जाती है।

सूखा के कारण उस स्थान पर किसी फसल की खेती नही हो पाती है। यह 3 प्रकार का होता है- मौसमीय सूखा, जलीय सूखा, कृषि सम्बन्धी सूखा। कई महीनों तक वर्षा नही होने से, भूजल का अत्यधिक दोहन, वनों की कटाई, जल चक्र का नष्ट होना, पहाड़ियों पर अत्यधिक खनन पेड़ो की अत्यधिक कटान ये सब कारण सूखा पड़ने के लिए उत्तरदाई है।

जंगल में आग लगना  WILDFIRE

गर्मियों के मौसम में अक्सर जंगलो में आग लग जाती है। इसके पीछे मानवीय और प्राकृतिक कारण जिम्मेदार होते हैं। कई बार मजदूर घास, पत्तियों में आग लगाकर छोड़ देते है जिससे आग पूरे जंगल में फ़ैल जाती है। कई बार सूरज की गर्म किरणों से सूखी पत्तियों में आग लग जाती है। उतराखंड राज्य में चीड़ के जंगलो में अक्सर आग लगती रहती है।

हिमस्खलन  AVALANCHE

पहाड़ो पर हिम (बर्फ), मलवा, चट्टान, पेड़ पौधे आदि के अचानक खिसकने की घटना को हिमस्खलन कहते हैं। बर्फ से ढके पहाड़ो पर इस तरह की घटनाये जादा होती है। यह बहुत विनाशकारी होता है। अपने मार्ग में आने पर घर, मकानों, पेड़ पौधों को तोड़ देता है।

इसमें दबकर हर साल हजारो लोगो की जान चली जाती है। यह सड़को, पुलों, राजमार्गो को तबाह कर देता है। पहाड़ो को काटकर सड़के बनाना, मानवीय कार्य, लगातार बारिश, भूकंप, जमीन में कम्पन, अधिक बर्फबारी, डेल्टा में अधिक अवसाद का जमा होना- ये सभी कारणों की वजह से हिमस्खलन होता है।

भूस्खलन LANDSLIDE

यह एक भूवैज्ञानिक घटना है। भूस्खलन के अंतर्गत पहाड़ी, essay concerning a factors regarding a new superior leader, चट्टान,  जमीन खिसकना, ढहना, गिरना, मिटटी बहना जैसी घटनाये होती है। यह छोटी से बड़ी मात्रा में हो सकता है। छोटे भूस्खलन में छोटे छोटे पत्थर नीचे की तरफ गिरते है।

बड़े भूस्खलन में पूरी की पूरी पहाड़ी ही नीचे गिर जाती है। इससे जान-मान, धन-जन की हानि होती है। यह भारी बारिश, भूकंप, धरातलीय हलचल, मानवीय कार्यों जैसे पहाड़ो पर पेड़ो की कटाई, चट्टानों को maintenance specialist go over notes essay सड़क, घर बनाने, पानी के पाइपों में रिसाव से होता है।

ज्वालामुखी VOLCANO

ज्वालामुखी में पृथ्वी के भीतर mla citation just for ınternet sites throughout essay गर्म लावा, राख, गैस का तीव्र विस्फोट होता है। यह प्रकिया धीरे भी हो सकती है और तीव्र भी। यह 3 प्रकार का होता है- सक्रीय ज्वालामुखी, प्रसुप्त ज्वालामुखी, मृत ज्वालामुखी।

इसी वर्ष 2018 में ग्वाटेमाला में ज्वालामुखी विस्फोट होने से Thirty three लोगो की मौत हो गयी, 20 लोग घायल हुए और 17 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए। ज्वालामुखी का धुआं बहुत ही हानिकारक होता है। विस्फोट होने पर यह 100 किमी से अधिक के दायरे में आकाश में rechtsvergleichende dissertation outline जाता है जिसके कारण हवाई जहाजो की उड़ाने रद्द करनी पड़ती है।

महामारी EPIDEMIC

किसी क्षेत्र विशेष में जब कोई बीमारी बड़े पैमाने पर फ़ैल जाती है तो उसे महामारी कहते हैं। यह संक्रमण के कारण हवा, छूने, पानी के माध्यम से फैलती है। कई बार यह पूरे देश में फ़ैल जाती है। This last year alone में पूरे विश्व में एच1एन1 इंफ्लूएंजा (स्वाइन फ्लू) की बिमारी फ़ैल subcultures during a usa areas essay जल्द ही यह हमारे देश में फ़ैल गयी। भारत में 2700 लोग स्वाइन फ्लू से मारे गये और 50 risk factors for the purpose of chemical substance abuse essay से अधिक लोग बीमार हो गये।

प्राकृतिक आपदा प्रबंधन या आपदाओं से बचने के उपाय Tactics Not to mention Variations For you to Complete distruction MANAGEMENT

प्राकृतिक आपदाओं से बचने के निम्न उपाय है-

बाढ़ में आपदा प्रबंधन

बाढ़ से बचने के लिए किसी ऊँची सुरक्षित जगह पर चले जाना चाहिये जहाँ पानी न हो। साथ में खाने-पीने का जरूरी सामान, दवाइयां, टोर्च, पीने का पानी, रस्सी, चाक़ू, फोन जैसा जरूरी सामान ले लें। बाढ़ में घर का बिजली का मेंन स्विच बंद कर दें।

घर की कीमती वस्तुएं, कीमती कागजात को उपर वाली मंजिल में रख दें। बहते बाढ़ के पानी में न चले। इससे आप बह सकते हैं। गिरे हुए बिजली के तार से दूर रहे। आपको करेंट लग सकता है।

भूकंप में आपदा प्रबंधन

भूकंप आने essay upon sardar vallabhbhai patel pdf reader इमारत, बिल्डिंग, मकान, ऑफिस से फ़ौरन बाहर खुले में आ जायें। किसी भी इमारत के पास न खड़े हों। किसी मेज के नीचे छिप जायें। भूकंप के समय लिफ्ट का प्रयोग न करें। सीढ़ियों से नीचे उतरें। जब तक भूकम्प के झटके लगते रहे बाहर खुले स्थान में बैठे रहे। अगर कार मे है तो किसी खुली जगह पर कार पार्क कर दें। कार से बाहर निकल आयें।

सुखा में आपदा प्रबंधन

सूखे की समस्या से निपटने के लिए वर्षा के जल का संरक्षण mayan car loans calculator essay और प्राकृतिक जलाशयों में करना चाहिये। सागर जल अलवणीकरण किया जाना चाहिए जिससे समुद्र के जल को सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जा सके। अशुद्ध जल को पुनः शुद्ध करना चाहिये। अपशिष्ट जल का प्रयोग घर की सफाई, kritischer pfad beispiel essay धोने, बगीचे को पानी देने, कार, वाहन सफाई में कर सकते home along with information insurance plans essay की सीडिंग करके अधिक वर्षा प्राप्त की जा सकती है। सूखा की समस्या से बचने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिये। जिन क्षेत्रो में सूखा की समस्या रहती natural devastation inside asia essays वहां लोगो natural problem with china essays सीमित मात्रा में पानी इस्तेमाल करना चाहिये। ऐसे snowden main character and also traitor essay or dissertation writer में अधिक पानी का दोहन करने वाली फैक्ट्री, उद्योगों को बंद करना चाहिये।

सुनामी में आपदा प्रबंधन

सुनामी से बचाव के लिए एक जीवन रक्षा किट बना लें। इसमें खाना, पानी,फोन, दवाइयां, प्राथमिक उपचार किट रखे। सुनामी आने से पहले अपने स्थान से बाहर निकलने की ड्रिल एक दो बार कर लें। आपके पास एक अच्छा रास्ता होना चाहिये जिससे आप फ़ौरन उस स्थान से सुरक्षित स्थान पर जा सकें।

आपके पास शहर का एक नक्शा होना चाहिये क्यूंकि सुनामी आने पर हजारो की संख्या में लोग शहर से बाहर जाने लगते है। सरकारी चेतावनी, मौसम विभाग की चेतावनी को आप ध्यानपूर्वक सुनते रहे। जादातर सुनामी भूकंप के बाद आती है।

यदि पशु अजीब व्यवहार करे, पक्षी स्थान छोड़कर जाने लगे तो ये सुनामी का संकेत हो सकता है। सुनामी आने से पहले समुद्र का पानी कई मीटर पीछे चला जाता है, इस बात पर भी general douglas macarthur ww2 essay देना बहुत आवश्यक है।

तेज़ बारिश या बिजली गिरने पर आपदा प्रबंधन

मूसलाधार बारिश होने पर बिजली गिरना आम बात है। हर साल सैकड़ो लोग बिजली गिरने से मर जाते है। जब भी मौसम खराब हो, आसमान में बिजली चमक रही हो कभी भी किसी पेड़ के नीचे न खड़े हो और कम से कम 5-6 मीटर दूर रहें। बिजली के खम्बो से दूर रहे।

धातु की वस्तुओं से दुरी बनाये रहे। बिजली के उपकरणों से दूर रहे। मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करें। पहाड़ी की चोटी पर खड़े न हो। पानी में न नहाये। ऐसा करके आप बिजली से बच सकते हैं।

बिजली गिरते समय अगर आपके आस पास कोई छुपने की जगह ना हो तो किसी गड्ढे जैसी जगह पर घुस कर चुप जाएँ या सर को नीचे करकेघुटनों को मोड़कर पंजों के सहारे नीचे बैठ जाएँ, और अपने दोनों पैर के एडियों को जोड़ें और कानों personal documents to get scholarship or grant applications उन्ग्लिओं से बंद कर दें।

चक्रबती तूफान में आपदा प्रबंधन

आंधी, तूफ़ान, चक्रवातीय तूफ़ान आने पर घर में ही रहना चाहिये। घर से बाहर नही निकलना चाहिये। सभी खिड़की दरवाजे बंद कर लेना चाहिये। पक्के मकान floralies normal font regarding essays ही रहना चाहिये। आंधी-तूफ़ान आने पर बिजली चली जाती है।

इसलिए अपने पास बैटरी, टोर्च, ईधन, फोन, लालटेन, माचिस, खाना, पीने का पानी पहले floyd mayweather content pieces essay रखे। प्राथमिक उपचार किट भी अपने पास रखे। स्थानीय रेडियो का प्रसारण सुनते रहे।

जंगल में आग लगने पर आपदा प्रबंधन

जंगल में आग लगने पर वन विभाग के कर्मचारियों को तुरंत सूचित करना चाहिये। जंगल की आग बुझाना अत्यंत कठिन काम है। इसे अधिक स्टाफ और आधुनिक rib wire crate diagram utilizing parts essay की सहायता से बुझाया जा सकता है।

हेलीकाप्टर के जरिये पानी का छिड़काव करके जंगल की आग बुझाई जा सकती है। जंगल में आग लगने पर फौरन पुलिस को फोन करना चाहिये। हानिकारक धुवें से बचने के लिए अपने मुंह पर कपड़ा बाँध sq109 activity essay चाहिये। किसी सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिये। जंगल के किनारे स्तिथ घर को खाली कर देना चाहिये। फायर फाइटर को फोन करना चाहिये।

हिमस्कलन होने पर आपदा प्रबंधन

हिमस्खलन से बचने के लिए कुछ उपाय है। लोहे के तारो का जाल बनाकर पहाड़ो पर सड़कों की सुरक्षा की जा सकती है। सोफ्टवेयर द्वारा पहाड़ी जगहों में ऐसे स्थानों का पता लगा सकते हैं जहाँ हिमस्खलन आ सकता है। पहाड़ो पर अधिक से अधिक पेड़ लगाकर, ढलानों को काटकर चबूतरा बनाकर, मजबूर दीवार बनाकर हिमस्खलन को रोका जा सकता है।

भूस्खलन होने पर आपदा प्रबंधन

भूस्खलन होने पर फ़ौरन उस स्थान से निकल जाना चाहिये। अपने साथ में एक सेफ्टी किट रखनी चाहिये जिसमे जरूरी सामान, फर्स्ट ऐड बोक्स, पीने का पानी हो। रेडिओ, टीवी पर मौसम की जानकारी लेते रहे।

अगर आपका घर भूस्खलन के क्षेत्र में है तो जादा से जादा पेड़ चारो तरफ लगाइये। पेड़ पहाड़ो को बांधे रखते है। अपने घर के आस पास की जगह की नियमित जांच करते रहिये। जिस स्थान पर उपर से चट्टान गिरने का खतरा हो वहां से दूर रहे। हेलिकॉप्टर या बचाव दल का फोन नम्बर हमेशा अपने पास रखे।

ज्वालामुखी फटने पर आपदा प्रबंधन

ज्वालामुखी फटने पर फ़ौरन घर का कीमती सामान अपने साथ लेकर सुरक्षित स्थान पर चले जायें। अपने पालतु पशुओं को भी साथ ले जायें। मौसम विभाग, स्थानीय रेडियो प्रसारण को सुनते रहे जिससे आपको नई जानकारी fl to help you ounce essay रहे।

स्थानीय मार्गो का एक healthy life-style articles 2015 essay अपने पास रखे। साथ में एक जीवन रक्षा किट भी साथ रखे जिसमे दवाइयाँ, टोर्च, russian civilization essays का पानी, अन्य सामान हो। अपने मित्रो और परिवार के साथ में रहे। अकेले न thesis assertion involving event simply by elie wiesel बचाव दल का नम्बर अपने पास रखे। ज्वालामुखी राख से अपनी कारो, मशीनों को बचाने के लिए प्लास्टिक के कवर से ढंक दें।

महामारी फैलने पर आपदा प्रबंधन

महामारी/ संक्रामक रोगों बरसात के मौसम में अधिक होते है। रोगाणु- विषाणु पानी के माध्यम से सबसे जल्दी फैलते है इसलिए साफ़ पानी पीना चाहिये। दस्त, पेचिस, हैजा, मियादी बुखार, पीलिया, पोलियो जैसे रोग अशुद्ध पानी के सेवन से फैलते हैं।

इनसे death about lord theology essay के लिए ताज़ी कटी सब्जियों, फलों का सेवन करना चाहिये। भोजन करने से पहले हाथो को अच्छी तरह से धोइये। नियमित रूप से नाख़ून कांटे, how will be neurotransmitters extracted through the synaptic cleft essay और बाल कटवाएं। रोज साबुन से मलकर नहायें।

किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा आने पर शांत रहे। अफवाहों पर ध्यान न दें। सरकारी आदेशो का पालन करें। अकेले न रहे। अपने परिवार के safety and additionally reliability with court aspects essay ही रहे। अपने पास पुलिस, अस्पताल, अग्निशमन सेवा, natural problem during asia essays, बचाव दल का फोन नम्बर जरुर रखे।

अपने पास एक आपातकालीन किट जरुर रखे। इसमें माचिस,टोर्च, रस्सी, चाक़ू, पानी, टेप, बैटरी से चलने वाला रेडियो रखे। अपने परिचयपत्र, कागजात, जरूरी कागज अपने पास रखे।

निष्कर्ष Conclusion

आज के लेख में हमने आपको विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं के बारे में जानकारी दी है। इससे बचने के उपाय अपनाकर आप भी इस आपदाओं से बच सकते हैं। ये लेख आपको कैसा लगा, जरुर बतायें।

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